stress

||योगी अश्विनी के साथ शुभपूजा की खास बातचीत||

Posted on Updated on

 

योग गुरु योगी अश्विनी ने कहा कि योग एक्सर्साइज़ से अलग है| आसन आसन होता है और एक्सर्साइज़ के स्टेप्स अलग होते हैं| योग को योग की तरह से करेंगे तभी वो फायदा देगा, योग को एक्सर्साइज़ की तरह से करेंगे तो ये नुकसान ही देगा| योग तभी फायदा देता है जब वो गुरु के सानिध्य में हो|

विश्व योग दिवस पर शुभपूजा ने योगी अश्विनी से योग पर खास बातचीत की..

  1. योग क्या है?

जीवन में दो ही चीज़े होती हैं- एक  प्रकृति और एक विकृति| जब हम विकृति की तरफ जाते हैं तो शरीर और बुद्धि दोनों ही खराब होते हैं परंतु जब हम प्रकृति की तरफ जाते है तो बुद्धि का विकास होता है और शरीर स्वस्थ होकर बैलेंस रहता है| विकृति से प्रकृति की तरफ जो प्रक्रिया ले जाती है उसे ही योग कहते हैं| योग एक बार जिसकी समझ में आ जाए फिर वो बीमार नहीं हो सकता|

  1. आम जीवन में योग कैसे करें और कितनी देर करें?

ये हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण ये है कि योग हमेशा गुरु के सानिध्य में ही करें| आपका गुरु आपको बेहतर जान सकता है कि आप कितनी देर योग करें| वो 5 मिनट के योग में ही आपको वो असर दिला सकता है जितना आप खुद से 5 घंटों में भी हासिल न कर पाएं| ये आपके और आपके गुरु के बीच संबंध पर भी निर्भर करता है| एक बार फिर कहूंगा कि योग गुरु होता है और गुरु ही योग होता है इसलिए योग हमेशा गुरु के सानिध्य में ही करें|

  1. योगकरने का सही तरीकाऔर वक्त क्या है ?

योग में न तो कोई रीति रिवाज़ होता है और न ही लाइफ स्टाइल; न तो आर्ट होता है और न ही योग का कोई धर्म होता है| ना तो इसमें किसी देवी-देवता को मानना है और न ही खान-पान का कोई प्रतिबंध करना है| योग आपको मुक्त करने के लिए है और आप गुरु के बताए रास्ते पर चलते हुए किसी भी वक्त योग कर सकते हैं| ये सब बातें सामान्य लोगों के लिए हैं लेकिन जैसे-जैसे आप योग में आगे बढ़ेगे तो प्रतिबंध भी लागू होने लगेगे हालांकि ये प्रतिबंध जबरन नहीं होते| लेकिन योग आप मे इतनाबस जाता है कि जो आपके लिए सही नहीं होता वो आप खुद से ही छोडऩे लगते हैं| इसमें न तो वक्त का कोई बंधन है और न ही डाइट का कोई प्रतिबंध|

  1. योग करते समये ब्लडप्रेशर, शूगर और दिल की बीमारी जेसे रोगों के मरीज़ को क्या ध्यान रखना चाहिए और कैसे योग नहीं करने चाहिएं ?

ये सब व्यक्तिगत कारण हैं और इनका समाधान भी व्यक्तिगत ही है| आमतौर पर ऐसी बीमारियां गलत लाइफ स्टाइल के कारण ही होती हैं जिनका उपचार भी योग में जल्दी ही हो जाता है|

  1. क्याब्लडप्रैशर, शूगर और दिल की बीमारी का ईलाज़ या उन पर कंट्रोल योग में संभव है ?

योग में किसी बीमारी का वर्णन नहीं है, सिर्फ प्रकृति और विकृति का ही वर्णन है| आप जब प्रकृति के साथ चलते हो तो कोई बीमारी आपको हो ही नहीं सकती; आप अपनी इच्छा से ही शरीर छोड़ोगे| हमारे पास योग करने वाले हर प्रोफेशन के लोग हैं जिनमें जज, वकील, चार्टेड एकाउंटेंट, स्टूडेंट्स और आदि है| इनमें से अब कोई बीमार नहीं होता क्योंकि वो सब प्रकृति के साथ चल रहे हैं| हां जिनको ये बीमारी हो चुकी है उनका भी उपचार योग में ही संभव है|

  1. तनावआजके दिन में सबसे बड़ी समस्या है जो इंसान को अंदर ही अंदर खाए जा रहा है… तनाव को कम करने के लिए किस तरह का योग करना चाहिए ?

तनाव से मुक्ति भी योग में सौ फीसदी संभव है| योग आपको सच्चाई दिखाता है कि आपकी असलियत क्या है| जब आपको समझ में आता है कि ये संसार नश्वर है तो आपको तनाव से भी निजात मिल जाता है| आपको पढ़ लिखकर नहीं बल्कि गुरु के सानिध्य में योग करते हुए खुद ही ये अहसास हो जाता है|

  1. इस योग दिवस पर आप लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगे ?

जैसा पिछले साल योग दिवस पर हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा था कि योग को माया से दूर रखें और योग गुरु के सानिध्य में ही करें, मैं भी यही कहना चाहता हूं कि सही योग करें और गुरु के सानिध्य में करें| गुरु भी वो हो जो माया से परे हो|

 

Vastu for Destressing

Posted on

The jam-packed schedule of today with long working hours and competitive pressure creates stress and loss in mental peace. Lifestyle disorders like heart trouble, high blood pressure, and digestive disorders along with mental health problems like depression, nervousness, aggressive and hostile behaviour are on constant increase. Thus in this situation, it becomes really crucial for us to create a relaxed and peaceful environment at home.

Vastu can help to create amicable and stress-free homes and make you feel ‘at home’ by just following few of these vastu measures.

  • Houses with main building towards the south-west of the plot, and more open spaces towards north and east, lead to stress free environment.
  • Nurture the form of free circulation of fresh air at your home by sunlight, plants, fountains, waterfalls, lawns and garden.
  • A toilet or a kitchen in the north-east corner contributes to building up of anxiety and stress. Overhead beams should also be avoided and never sleep under a beam.
  • The contaminants like formaldehydes, organic gases emitted by air fresheners, tobacco smoke, plants, plywood and carpet binders, asbestos, electromagnetic fields and termite treatments; must be avoided.
  • Avoid the build-up of electromagnetic and electrostatic fields from electrical equipment; electronic gadgets when left on while not in use.
  • Prefer the renovation or paint during the summer season, and four to five hours should be left before moving in.

 

 

Power of OM : Why should we chant OM?

Posted on Updated on

The entire universe is composed of vibrations which produce audible and inaudible sounds, which are experienced by living beings. ‘Shabda Brahmane-nishnata parambrahmadi gachhati’ means the primordial sound which is the base of our creation and source of everything. As one gets immersed in the Shabda Brahman i.e. OM, he enters in to the Parabrahman (all-pervading one-consciousness) automatically. So OM is the prime subject around which the entire creation revolves, it is the permanent truth within which everything exists.

The word OM or often spelled as ‘AUM’ is a three letter word composed of A, U and M; each letter symbolising different state of time.

  • A-Waking state
  • U– Dream state
  • M-Deep sleep of consciousness

As we chant AUM we connect with our true self by which we ultimately connect with the Supreme power. As in the sixth verse of Bhagvad Gita, Lord Krishna says “Etad-yonini bhutani sarvanitya upadharaya. Aham krtsnasya jagatah prabhavah pralayas thata”. He says that the entire creation is born out of me and it resides in me, and dissolves back into me. Chanting the eternal mantra OM results in the production of a vibration that resemble the original vibration, produced at the time of creation. The sound AUM, when chanted, vibrates at the frequency of 432 Hz, which is the same vibrational frequency found throughout everything in nature. Relevance of this word is not only mentioned in Vedas but also in holy Bible, “In the beginning was the Word and the Word was with God and the Word was God.

 

Benefits of chanting OM- Ultimate stress bustershubhpuja.com

 

  • Regular chanting of OM results in the increased efficiency of the cells of the body which can relieve us from the varied health issues.
  • The mental and physical energy rejuvenates and positivity is achieved all around.
  • Ultimate stress reliever that removes all our mental worries, and relax our body and mind.
  • Regulates the hormonal system and improves the digestion.
  • It helps in controlling the emotions and instant anger.
  • As we regain our peace of mind, increased compatibility and understanding is experienced in our relationships.

Thus the power of chanting OM infuses us with energy that makes us serene and divinity is experienced. Meditating while chanting this mantra leads us to the state of knowing our true self, which explain that soul is immortal and dissolved in the eternal Universe even after the physical body dies.

Scientific method of Chanting Om to achieve results

Scientifically, the correct method to chant AUM is to pronounce A for 3 seconds, U for 5 seconds and M for 6 seconds. As one repeats the mantra for 15 to 20 times, with each passing time the state of deep relaxation will be achieved. So focus on the power of OM and release all your worries by easy meditation.

Contributed By: Meenakshi Ahuja